पुलिस महानिदेशक,छत्तीसगढ़
बच्चे राष्ट्र का भविष्य होते हैं, उनके सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हुए उन्हें समाज में उपेक्षा, शोषण, दुर्व्यवहार, हिंसा अथवा किसी भी अन्य जोखिम से सुरक्षित रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। बच्चे उम्र में छोटे होने के कारण वे मानसिक व शारीरिक रूप से परिपक्व नहीं होते हैं, लिहाजा सहज रूप से अपराधियों द्वारा उन्हें अपना शिकार बना लिया जाता है। बच्चों के ऊपर घटित होने वाले प्रमुख अपराध हैं- बाल श्रम, बाल विवाह, बाल तस्करी, बाल यौन उत्पीड़न, शारीरिक दंड, ऑनलाईन शोषण आदि, जिससे बचाया जाना महती आवश्यक है। बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा हमारा ध्येय है, ताकि बड़े होकर पूरी क्षमता के साथ स्वयं अपना एवं देश का भविष्य संवार सकें। इस हेतु बाल संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहे सभी सरकारी एवं गैर शासकीय संस्थाओं सहित समाज को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।
छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा बाल सुरक्षा को लेकर नित नये उपाये किये जा रहे हैं। इसी कड़ी में यूनिसेफ़ के साथ मिलकर संयुक्त रूप से बाल संरक्षण कानूनों और मुद्दों पर जागरूकता लाये जाने के लिए विभिन्न 09 विषयों क्रमशः लिंग आधारित हिंसा, सषस्त्र संघर्ष में बच्चे, विधि से संघर्षरत बच्चे, बाल यौन शोषण, बाल विवाह, बाल श्रम और तस्करी, किषोर न्याय, बच्चों के प्रति कू्ररता एवं नवीन कानूनों पर चाईल्ड सेफ्टी माड्यूल विकसित कर लांच किया गया है। मुझे पूरी उम्मीद है कि यह मॉड्यूल बच्चों के अधिकारों सहित उनके साथ किये जाने वाले व्यवहारों के संबंध में जागरूकता लाये जाने में काफी उपयोगी सिद्ध होगा। इस अभिनव प्रयास के लिए पुलिस मुख्यालय के संलग्न सभी अधिकारी एवं यूनिसेफ के प्रतिनिधियों को साधूवाद देता हूं।