छत्तीसगढ़ पुलिस ने बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए कईं प्रणालियों को स्थापित करने की दिशा में काम किया है, विशेष रूप से बाल मैत्रीपूर्ण पुलिसिंग पर। इससे पुलिस और बच्चों के बीच एक सकारात्मक संबंध विकसित हुआ है, जिसमें पुलिस को एक दोस्त और विश्वसनीय संस्था के रूप में देखा जाता है। इसके परिणामस्वरूप, राज्य में 117 पुलिस थानों को चाइल्ड फ्रेंडली के रूप में विकसित किया गया है। जब बाल मित्र थाने की स्थापना की गई तब चार मुख्य पहलुओं पर ध्यान दिया गया। इनमें बाल मैत्रीपूर्ण ढांचा, बाल मैत्रीपूर्ण प्रक्रियाएँ, और पुलिस द्वारा अनुसरण किया जाने वाला बाल मैत्रीपूर्ण व्यवहार शामिल है।


1. बाल मित्र पुलिस स्टेशन में एक बाल मैत्रीपूर्ण कोना होता है, जिसमें चार्ट, पोस्टर, दीवारों पर चित्रकला आदि होती है और बाल सहायता डेस्क होता है।
2. प्रथम चरण में राज्यभर में 117 पुलिस थानों को बाल मित्र पुलिस थाना के रूप में विकसित किए गए हैं। इस संबंध में प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से पुलिस अधिकारियों का क्षमता निर्माण किया गया है। जिला-वार प्रशिक्षण भी किया जा रहा है।
3. बाल मित्र पुलिस थानों के डिज़ाइन को अंतिम रूप देने के लिए बच्चों के सुझावों को शामिल किया गया है (निबंध लेखन और चित्र द्वारा)।
4. ऐसे पुलिस थानों को दूरस्थ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी स्थापित किया गया है।
5. विभागों द्वारा बाल मित्र दृष्टिकोण की ओर कई पहलें ली गई हैं। इनमें शामिल हैं -
a. 117 पुलिस थानों को बाल मित्र थानों के रूप में विकसित करने के लिए SJPU/ CWPOs के क्षमता निर्माण हेतु प्रशिक्षण।
b. राज्य पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में DSPs और SIs के पाठ्यक्रम में बाल संरक्षण विषय को शामिल किया गया है। पूर्व में बाल संरक्षण विषय पर 60 मास्टर प्रशिक्षकों को 4 मॉड्यूलों पर प्रशिक्षित किया गया है।
c. बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों की जानकारी और विवेचना हेतु चार दिवसीय TOT कार्यक्रम आयोजित।
6. बाल संरक्षण दृष्टिकोण अब और अधिक संरचित है – इस हेतु SOPs विकसित किए गए हैं, डेटा का संग्रह और विश्लेषण संयुक्त रूप से अधिक मजबूत हो गया है, जिसमें UNICEF द्वारा बनाई गई एक मॉनिटरिंग तंत्र / मैट्रिक्स का उपयोग किया जाता है। बाल मित्र थानों का डेटा PHQ स्तर पर मासिक आधार पर संकलित किया जाता है।
7. समस्त हितधारक विभागों के बीच सहयोग व समन्वय में वृद्धि हुई है।
8. पुलिस नई चुनौतियों के प्रति संवेदनशील हुई है। जैसे, बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध आदि। क्षमता निर्माण पुलिस अधिकारियों के आत्मविश्वास को बढ़ाता है कि वे समाज के महत्वपूर्ण अंग हैं, साथ ही उनके ज्ञान को नए प्रकार के अपराधों का सामना करने के लिए गति प्रदान करता है।